शापित हवेली
"कभी-कभी कुछ रहस्य हमें तब तक नहीं छोड़ते जब तक हम उन्हें खुद अपनी आँखों से देख न लें… लेकिन क्या हर रहस्य को जानना ज़रूरी होता है? शायद नहीं… और शायद मेरे साथ जो हुआ, वो भी एक ऐसा ही राज़ था… एक ऐसा राज़, जिसने मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी।"
"ये बात तब की है जब मैं एक छोटे से गाँव में गया था, जहाँ मेरे एक दोस्त राहुल ने मुझे अपने घर बुलाया था। वह गाँव काफ़ी पुराना था, चारों तरफ़ घने जंगल और शांत माहौल। लेकिन गाँव के बाहर एक पुरानी हवेली थी, जिसके बारे में कई भयानक कहानियाँ प्रचलित थीं। कहते हैं, वहाँ कोई भी गया, तो वापस नहीं आया…"
"राहुल ने मुझे बताया कि उस हवेली में रहने वाले लोगों की अचानक मौत हो गई थी, और तब से ही वहाँ अजीब घटनाएँ होने लगीं। गाँव के लोग वहाँ जाने से डरते थे, लेकिन मुझे इन सब पर विश्वास नहीं था। मैंने ठान लिया कि मैं उस हवेली को देखूँगा… और यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी।"
"अगली रात, मैंने टॉर्च उठाई और अकेले ही हवेली की ओर चल पड़ा। हवेली टूटी-फूटी थी, दीवारों पर दरारें थीं और वहाँ घना अंधेरा छाया हुआ था। जैसे ही मैंने अंदर कदम रखा, मुझे लगा कि किसी ने मेरी पीठ पर हाथ रखा… लेकिन जब मैंने पीछे मुड़कर देखा, तो वहाँ कोई नहीं था।"
"अंदर का नज़ारा डरावना था – दीवारों पर अजीब निशान, टूटी-फूटी खिड़कियाँ और धूल से भरे फर्नीचर। अचानक मुझे किसी के फुसफुसाने की आवाज़ आई… 'कौन… आया… है?' मैं डर से कांपने लगा।"
"मैंने टॉर्च की रोशनी घुमाई, और तभी मुझे एक परछाई दिखाई दी! वह परछाई हवा में तैर रही थी, उसकी आँखें जलती हुई लाल थीं… और तभी वह ज़ोर से चीख़ी। मैं चीख़ता हुआ दरवाज़े की ओर भागा, लेकिन दरवाज़ा अपने आप बंद हो चुका था।"
"मैंने ज़ोर से दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन वह नहीं खुला। तभी मुझे लगा जैसे कोई मेरे कान में फुसफुसा रहा हो – 'तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था… अब तुम भी… हमारे जैसे बन जाओगे…' अचानक मेरे कंधे पर ठंडा हाथ पड़ा… और मैं बेहोश हो गया।"
"जब मेरी आँख खुली, तो मैं गाँव के एक घर में था। गाँव के लोग मेरे चारों ओर खड़े थे। उन्होंने बताया कि मैंने पूरी रात हवेली में बिता दी थी, और सुबह मुझे बेहोश पाया गया। लेकिन… जो सबसे डरावनी बात थी… वह यह थी कि हवेली पिछले 50 सालों से बंद पड़ी थी… और वहाँ कोई जाता भी नहीं था।"
"तो फिर… जो मैंने देखा… जो मैंने महसूस किया… वो क्या था? क्या वो सिर्फ़ मेरा भ्रम था? या सच में कुछ था जो अब भी उस हवेली में रहता है? मैं नहीं जानता… लेकिन आज भी जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ, तो मेरी रूह काँप उठती है…"
"अगर आप कभी किसी वीरान जगह जाएँ, तो याद रखिए… हर रहस्य को जानना ज़रूरी नहीं होता… और कभी-कभी… अज्ञात रह जाना ही बेहतर होता है।"
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